Vodafone-Idea’s fate hinges on the Supreme Court’s AGR verdict today | सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुक्रवार तक टली, वोडाफोन-आइडिया को 50,399 करोड़ और एयरटेल को 25,976 करोड़ रुपए सरकार को करने हैं अदा


नई दिल्ली10 मिनट पहले

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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में बताया कि सरकार ने अब तक आरकॉम से 31,000 करोड़ रुपए रिकवरी की है, अब मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त, 2020 को होगी

  • सरकार ने अब तक आरकॉम से 31,000 करोड़ रुपए रिकवरी की है
  • कंपनियां एजीआर की रकम नहीं चुकाना चाहती इसलिए खुद को दिवालिया घोषित कर रही हैं

एजीआर मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई टल गई है। आज सबकी नजरें वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल पर थीं, लेकिन अब सुनवाई शुक्रवार को होगी। दरअसल, वोडाफोन आइडिया, एयरटेल और आरकॉम ने सुप्रीम कोर्ट से देनदारी के लिए 10-15 साल के लंबे समय की मांग की है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि एजीआर के तहत वोडाफोन आइडिया को 50,399 करोड़ और भारती एयरटेल को 25,976 करोड़ रुपए सरकार को अदा करना हैं।

आज सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा, सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ-साथ टेलीकाम कंपनियों के रवैये से काफी नाराज लगे। उन्होंने तुषार मेहता को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि सरकार की ओर से इस मामले में इतनी नरमीं क्यों बरती जा रही है? और अब तक सरकार को कितनी रकम मिली?

एयरसेल के वकील रवि कदम ने कोर्ट में कहा कि बकाया राशि की अदायगी के लिए कंपनी अपने स्पेक्ट्रम और लाइसेंस को बेचेगी। जस्टिस मिश्रा ने इस पर पूछा कि स्पेक्ट्रम और लाइसेंस को बेचने की अनुमति किसने दी? तो जवाब में कंपनी के वकील ने एनसीएलटी का हवाला दे दिया। जस्टिस मिश्रा ने इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे उन्हें सूचित करें कि एजीआर की रकम वसूली के लिए सरकार के पास क्या प्लान है? और स्पेक्ट्रम को आईबीसी के तहत क्यों नहीं बेचा जा सकता है? हालांकि सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में बताया कि सरकार ने अब तक आरकॉम से 31,000 करोड़ रुपए रिकवरी की है। अब मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त, 2020 को होगी।

क्या होता है एजीआर?
एडजस्टेड ग्रोस रेवेन्यू (एजीआर) दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला लाइसेंसिंग और यूजेज फीस है। इसके अलावा इसमें स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज (3 से 5 फीसदी के बीच) और लाइसेंसिंग फीस भी शामिल है, जोकि कुल लाभ का 8 फीसदी हिस्सा होता है, भी एजीआर का हिस्सा माना जाता है।

विवाद क्या है?

पूरे विवाद का जड़ एजीआर के कैलकुलेशन को माना जाता रहा है, क्योंकि दूरसंचार विभाग एजीआर की गणना टेलीकॉम कंपनियों की कुल आय पर कर रहा है। जिसका साफ अर्थ है कि एजीआर में कंपनियों के लाभ के साथ-साथ प्रॉपर्टी बिक्री पर कमाएं लाभ और डिपॉजिट इंटरेस्ट को भी शामिल किया जाता है। लेकिन, टेलीकॉम कंपनियां सिर्फ सेवाओं पर होने वाली आमदनी को एजीआर का हिस्सा मानना चाहती हैं। टेलीकॉम कंपनियां इसके उलट सिर्फ कुल लाभ को ही एजीआर का हिस्सा माने जाने की मांग कर रहीं हैं।

पिछली बार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कंपनियां एजीआर की रकम नहीं चुकाना चाहती इसलिए खुद को दिवालिया घोषित कर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक एजीआर के तहत 1.47 लाख करोड़ रुपए बकाया है। जिसमें सबसे ज्यादा वोडाफोन आइडिया को 50,399 करोड़ और भारती एयरटेल को 25,976 करोड़ रुपए जमा करना है। जानकारों कि मानें तो इस मामले में सरकार टेलीकॉम कंपनियों को ढील देने के मूड में है।

टेलीकॉम कंपनियों की ओर से दिग्गज वकील
एजीआर मामले पर सुनवाई के दौरान देश के जाने-माने वकील कोर्ट में मौजूद रहे।

  • दूरसंचार विभाग से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
  • भारती एयरटेल के लिए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी
  • वोडाफोन आइडिया की ओर से मुकुल रहतोगी
  • टाटा टेलीसर्विसेज की ओर से रामजी श्रीनिवास और अरविंद दातर
  • ह्यूजेस कॉम्युनिकेशन के लिए कपिल सिब्बल
  • एयरसेल के लिए वरिष्ठ वकील रवि कदम
  • आरकॉम की ओर से श्याम दीवान

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