Market News In Hindi : Between March and May, the Indian equity market lagged behind in the recovery rate, Rasiya’s market in the forefront | मार्च से लेकर मई के बीच रिकवरी रेट में भारतीय इक्विटी बाजार दुनिया में सबसे पीछे, रसिया का बाजार सबसे आगे


  • जर्मनी के बाजार का रिकवरी रेट 6.10 प्रतिशत रहा
  • फ्रांस के बाजार में 3.60 प्रतिशत की गिरावट रही

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 07:48 PM IST

मुंबई. चीन में इस वर्ष के प्रारंभ में जब कोविड-19 चरम पर था, तब सेंसेक्स और निफ्टी सर्वोच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। उस समय तक कोविड-19 चीन तक ही ज्यादा था। लेकिन मार्च में विश्वभर को चपेट में लेने वाले इस वायरस से पूरी दुनिया के बाजार गिर गए। हालांकि इसके बाद रिकवरी की बात आई तो भारतीय बाजार सबसे धीमे रहे हैं। जबकि रसिया का बाजार सबसे आगे है।

अमेरिकी बाजार ने 3.90 प्रतिशत की रिकवरी की

रिकवरी के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि अमेरिका के डाऊजोंस ने 3.90 प्रतिशत की दर से रिकवरी की है। 11 मार्च को यह 23,553 अंक पर था, जो 23 मई को 24,465 अंक पर पहुंच गया। जर्मनी के डीएएक्स का सूचकांक इसी दौरान 10,438 से बढ़कर 11,074 पर पहुंच गया। यानी रिकवरी रेट 6.10 प्रतिशत की रही। फ्रांस के सीएसी का बाजार 4,610 से घटकर 4,444 पर आ गया। इसमें -3.60 प्रतिशत की रिकवरी रही। हालांकि इसे गिरावट ही माना गया है।

रसिया के बाजार ने 8.70 प्रतिशत की रिकवरी की

लंदन के एफटीएसई का सूचकांक 5,876 से बढ़कर 5,993 पर पहुंच गया। इसमें 1.90 प्रतिशत की दर से रिकवरी दिखी। इसी तरह जापान के निक्केई की उछाल 5 प्रतिशत की रही। यानी यह 19,416 से बढ़कर 20,388 पर चला गया। जबकि रसिया का बाजार सबसे तेज रिकवर हुआ। यह 2,493 से बढ़कर 2,709 पर चला गया। 8.70 प्रतिशत की रिकवरी इसमें इस दौरान देखी गई। ब्राजील का बाजार 85,171 से घटकर 82,173 पर आ गया। इसमें 3.50 प्रतिशत की गिरावट दिखी।

चीन का बाजार अभी भी 5.20 प्रतिशत की गिरावट पर

चीन के शंघाई का सूचकांक 2,968 से गिरकर 2,814 पर आ गया। यह गिरावट 5.20 प्रतिशत की रही। भारत के सेंसेक्स की बात करें ते इसमें अभी तक 14 प्रतिशत की गिरावट रही। यह 35,697 से गिरकर 30,672 पर कारोबार कर रहा है। जबकि निफ्टी का सूचकांक 10,458 से गिरकर 9,039 पर आ गया है। यानी 13.60 प्रतिशत की गिरावट इसमें भी दिखी है।

कोविड-19 का असर अभी भी बना रहेगा

दरअसल पूरी दुनिया में भारत के साथ मार्च में शेयर बाजारों में भारी गिरावट शुरू हुई थी। नई उंचाई छूने का उत्साह महज दो महीने ही टिका। उसके बाद उंचाई से गिरकर जिस स्तर पर बाजार पहुंचा, वहां से अभी तक सुधर नहीं पाया है। थोड़ा बहुत रिकवर जरूर हुआ, पर वह भी अस्थाई रिकवरी है। हालांकि भारतीय बाजार अभी भी कब तक रिकवर करेगा, यह तो पता नहीं है। पर कोविड-19 के गहराते असर से इसमें काफी समय लगने की उम्मीद है।

भारत में राहत पैकेज काफी देर से घोषित हुआ

विश्व के शीर्ष बाजारों से तुलना करें तो भारतीय बाजार का रिकवरी रेट सबसे नीचे रहा है। इसके कारण कई हैं। एक तो भारत ने राहत पैकेज का ऐलान काफी देर से घोषित किया। साथ ही लॉकडाउन लगातार बढ़ता गया और आगे भी इसमें बढ़ने की गुंजाइश ही है। इस समय भारत में चौथे चरण का लॉकडाउन चल रहा है। देश के प्रमुख शहरों में हालात अभी भी गंभीर है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में तो काफी कुछ शुरू हो गया है, पर भारत अभी भी सावधानी बरत रहा है।

जून में भी हालात में सुधार की उम्मीद कम

भारत में अभी ग्रामीण इलाकों में फैक्टरी जरूर शुरू हुई हैं, लेकिन प्रवासियों के गांव जाने से वहां पर कोविड-19 के गहराने की संभावना ज्यादा है। भारत में अप्रैल पूरी तरह से और मई भी पूरी तरह से कारोबारी गतिविधियों के लिए ठप रहा है। स्थिति जून में भी कुछ इसी तरह की रहने की है। जिन सेक्टर्स में काम शुरू हुए, वहां लेबर की कमी के कारण हालत सही नहीं है। क्योंकि लेबर गांव जा चुके हैं।

बाजार अनिश्चितता के दौर में अभी भी है

लॉजिस्टिक सेवा अभी भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाई है। ऐसी स्थिति में शेयर बाजार में रिकवरी होने की उम्मीद अभी भी काफी कम है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि जून मध्य के बाद बाजार में कुछ रिकवरी दिख सकती है। अभी भी बाजार पूरी तरह से अनिश्चितता के दौर में है। मार्च में जब लॉकडाउन शुरू हुआ था उस समय भारत सहित वैश्विक बाजार 38 प्रतिशत तक टूट गए थे।



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