जालंधर RTO ऑफिस में एजेंटों व प्राइवेट करिंदों का बोलबाला एक बार फिर से जोरों पर

जालंधर // (सुनील चावला, विशाल मित्तल)- रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के ऑफिस में एजेंटों व प्राइवेट करिन्दों का बोलबाला जोरों पर । जी हां आपको बता दें कि आरटीए बरजिंदर सिंह का कहना है कि उनके ऑफिस में काम करने वाले वर्करों की गिनती 14 लोगों की है मगर आपको बता दें उस ऑफिस में काम करने वालों की गिनती करीब 25 से 30 लोगों के आसपास होगी जिनमें से सूत्रों अनुसार साहब के करीबी A नाम का व्यक्ति जो कि वहां का कर्ताधर्ता बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि यह अनु नाम का

व्यक्ति महीने में मोटी कमाई कर लेता है वही स्कूटर कार की आर RC का डिपार्टमेंट सारे काम की कमान इसी के हाथ में है. इसका मन चाहे तो न्यू आरसी 1 दिन में प्रिंट करके भी दे सकता है साहब के इस गरीबी व्यक्ति को किसी का कोई भी खौफ नहीं है वहां पर हालांकि आरटीए बृजेंद्र सिंह का कहना है कि मेरा किसी भी प्राइवेट वर्कर के साथ कोई भी ताल्लुक नहीं है मगर प्राइवेट वर्कर (करिन्दा) दिन में कई बार साहब के दफ्तर में दाखिल होता है इसी तरह चालान भुगतने आए लोगों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है वहां पर भी लंबी कतारों में लगकर लोगों के चालान भुगते नहीं जाते मगर वह काम वहां पर मौजूद एजेंट मिनटों में काम करवा कर ले आते हैं ओर मोटी कमाई करते हैं और जिसका हिस्सा वहां पर काम कर रहे मंजूर शुदा व गैर सरकारी तरीके से काम कर रहे वर्करों को हिस्सा मिल जाता है । जिसका हरजाना आम जनता को भुगतना पड़ता है क्योंकि वह एजेंट एक चालान के पीछे 200 से ₹300 लेते हैं अगर वह चालान कोई बड़ी रकम का हो तो हजार से ₹2000 कमाते हैं क्या इन एजेंटों का बोलबाला इसी तरह सरकारी विभागों में चलता रहेगा ……!

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