India GDP: India GDP Growth Rate Data 2020 Update | Economy of India, India Gross Domestic Product (GDP) Quarterly | देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में दूसरी तिमाही में आई 7.5% की गिरावट, अनुमान 10.7% तक गिरावट का था


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मुंबई16 मिनट पहले

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  • चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP की ग्रोथ में 23.9% की गिरावट आई थी
  • RBI ने दूसरी तिमाही के लिए सबसे कम 8.6% की गिरावट का अनुमान जताया था

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की ग्रोथ में 7.5% की गिरावट आई है। हालांकि यह गिरावट अब तक के सभी विश्लेषकों के अनुमानों से काफी कम है। सभी विश्लेषकों ने 8% से 12% तक की गिरावट का अनुमान जताया था। सबसे कम अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का था। इसने 8.6% की गिरावट का अनुमान जताया था। पहली तिमाही में 23.9% की गिरावट आई थी। यह आंकड़ा एनएसओ ने जारी किया।

तिमाही में जीडीपी का अनुमान 33.14 लाख करोड़

सितंबर की तिमाही में स्थिर प्राइस (2011-12) पर GDP का अनुमान 33.14 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। एक साल पहले इसी अवधि में यह 35.84 लाख करोड़ रुपए था। यानी 7.5% की गिरावट दर्ज की गई है। 2019-20 की दूसरी तिमाही में 4.4% की ग्रोथ थी। 2011-12 के आधार पर अगर बेसिक प्राइस को देखें तो GVA की ग्रोथ में 7% की गिरावट आई है। यह 30.49 लाख करोड़ इस साल सितंबर तिमाही में आंका गया है जबकि एक साल पहले यह 32.78 लाख करोड रुपए था।

दूसरी तिमाही में 47.22 लाख करोड़ का अनुमान

सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) से जारी आंकड़ों के मुताबिक 2020-21 की दूसरी तिमाही के वर्तमान मूल्य पर GDP 47.22 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। एक साल पहल इसी अवधि में 49.21 लाख करोड़ रुपए था। इसमें 4% की गिरावट आई है। जबकि एक साल पहले इसमें 5.9% की ग्रोथ थी। GVA इसी समय में 44.46 लाख करोड़ की तुलना में 42.80 लाख करोड़ रुपए था। यानी 4.2% की गिरावट रही है।

6 महीने का अनुमान 60.04 लाख करोड़

साल 2020-21 के पहले 6 महीने (अप्रैल-सितंबर) के लिए स्थिर प्राइस (2011-12) पर जीडीपी का अनुमान 60.04 लाख करोड़ रुपए आंका गया है, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 71.20 लाख करोड़ रुपए था। इसमें 15.7% की गिरावट पहली छमाही में दिखी है। जबकि एक साल पहले इसमें 4.8% की ग्रोथ थी। 2020-21 के अभी के मूल्य पर जीडीपी का अनुमानित मूल्य 85.30 लाख करोड़ रुपए है जबकि एक साल पहले यह 98.39 लाख करोड़ रुपए था। इसमें 13.3% की गिरावट आई है। एक साल पहले इसमें 7% की ग्रोथ थी।

दूसरी तिमाही का अनुमान 2020-21 के खरीफ सीजन के दौरान एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन के एडवांस अनुमान के आधार पर लगाया गया है। इसमें दूध, अंडे, मटन और अन्य सेगमेंट शामिल हैं।

8 कोर इंडस्ट्रीज के आंकड़ों में गिरावट

GDP के आंकड़ों से ठीक कुछ ही देर पहले 8 कोर इंडस्ट्रीज के अक्टूबर महीने के आंकड़ा जारी किए गए। आंकड़ों के मुताबिक, 8 कोर इंडस्ट्रीज का आंकड़ा 124.2 पर अक्टूबर में रहा है। यह अक्टूबर 2019 की तुलना में 2.5% कम है। अप्रैल से अक्टूबर 2021 की ग्रोथ की बात करें तो इसमें 13% की गिरावट दर्ज की गई है।

दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था खुली है

हालांकि पहली तिमाही के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में देश में पूरी तरह से लॉकडाउन था। मई के अंत में जाकर गतिविधियां और आवागमन शुरू हुआ था। जबकि दूसरी तिमाही में पूरी अर्थव्यवस्था खुल गई है। ऐसे में GDP में कम गिरावट रह सकती है। रेटिंग एजेंसियों का अनुमान था कि दूसरी तिमाही में GDP 10 से 11% के बीच गिर सकती है।

RBI का अनुमान 8.6% की गिरावट का था

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अनुमान था कि GDP में 8.6% की गिरावट रहेगी। मूडीज ने 10.6, केयर रेटिंग ने 9.9, क्रिसिल ने 12, इक्रा ने 9.5% और एसबीआई रिसर्च ने 10.7% की गिरावट का अनुमान जताया था। जिन सेक्टर्स में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी उनमें कृषि, बैंकिंग एवं फाइनेंस और सेवा सेक्टर हैं। जबकि मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन में गिरावट आ सकती है।

लिस्टेड कंपनियों का मुनाफा रिकॉर्ड बढ़ा

गुरुवार को ही सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने कहा कि दूसरी तिमाही में लिस्टेड कंपनियों का मुनाफा 1.50 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह अब तक किसी एक तिमाही में सबसे ज्यादा फायदा है। इससे पहले 2014 की चौथी तिमाही में 1.18 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था।

सुधार की उम्मीद है दूसरी तिमाही में

दूसरी तिमाही में इसलिए भी सुधार की उम्मीद थी क्योंकि एक तो अनलॉक की वजह से आवाजाही शुरू हुई। दूसरा हर सेक्टर खुले हैं और तीसरा दूसरी तिमाही की कंपनियों की अर्निंग अच्छी रही है। डीजल, बिजली, जीएसटी जैसे तमाम जो खपत और कलेक्शन के मोर्चे रहे हैं, उनमें सुधार बहुत अच्छा रहा है।

GST कलेक्शन 1.05 लाख करोड़

अक्टूबर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) 1.05 लाख करोड़ रुपए रहा है जो एक साल पहले की तुलना में ज्यादा रहा है। साथ ही देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रिपोर्ट का अनुमान है कि नवंबर में GST 1.08 लाख करोड़ रुपए रहेगा। वैसे जुलाई सितंबर के दौरान विश्व की ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था में गिरावट ही रही है। हालांकि चीन और अमेरिका जैसे देशों की अर्थव्यवस्था में अच्छी बढ़त भी देखी गई है। चीन की अर्थव्यवस्था 4% तो अमेरिका की 33% बढ़ा है।

क्या है GDP
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। जीडीपी किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है। अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इसका यह भी मतलब है कि लोगों का जीवन स्तर भी आर्थिक तौर पर समृद्ध हो रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि कौन से क्षेत्र में विकास हो रहा है और कौन सा क्षेत्र आर्थिक तौर पर पिछड़ रहा है।

जीवीए क्या है

ग्रॉस वैल्यू ऐडेड यानी जीवीए। साधारण शब्दों में कहा जाए तो जीवीए से किसी अर्थव्यवस्था में होने वाले कुल आउटपुट और इनकम का पता चलता है। यह बताता है कि एक तय अवधि में इनपुट कॉस्ट और कच्चे माल का दाम निकालने के बाद कितने रुपए की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन हुआ। इससे यह भी पता चलता है कि किस खास क्षेत्र, उद्योग या सेक्टर में कितना उत्पादन हुआ है।

नेशनल अकाउंटिंग के नजरिए से देखें तो मैक्रो लेवल पर जीडीपी में सब्सिडी और टैक्स निकालने के बाद जो आंकड़ा मिलता है, वह जीवीए होता है। अगर आप प्रोडक्शन के मोर्चे पर देखेंगे तो आप इसको नेशनल अकाउंट्स को बैलेंस करने वाला आइटम पाएंगे।

जीडीपी और जीवीए में अंतर क्या है

GVA से प्रोड्यूसर यानी सप्लाई साइड से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का पता चलता है। जबकि जीडीपी में डिमांड या कंज्यूमर साइड की तस्वीर दिखती है। जरूरी नहीं कि दोनों ही आंकड़े एक से हों क्योंकि इन दोनों में नेट टैक्स के ट्रीटमेंट का फर्क होता है।

इन दोनों में कौन-सा पैमाना अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर बताता है

जीवीए से हर सेक्टर के उत्पादन आकड़ों की अलग तस्वीर मिलती है। इससे नीति निर्माताओं को यह जानने में मदद मिलती है कि क्या किसी सेक्टर को इंसेंटिव की जरूरत है, लेकिन जीडीपी का आंकड़ा तब अहम साबित होता है जब अपने देश की तुलना दूसरे देश की अर्थव्यवस्था से करनी होती है। इसमें दोनों देशों की आय की तुलना की जाती है।



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