Human Capital Index: indians are shorter and earning lesser than they should, says world bank’s human capital index – भारतीयों की जितनी लंबाई और कमाई होनी चाहिए, उतनी होती नहीं है: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट


नई दिल्ली

हममें से कइयों को लगता है कि वे अपनी मेहनत का उचित फल नहीं पा रहे हैं। कई यह भी सोचते हैं वे थोड़े से नाटे हैं। दिमाग में ऐसी बातें यूं ही नहीं आतीं। वर्ल्ड बैंक का ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि हर एक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने पर कमाई में 8% का इजाफा हो जाता है। चूंकि औसत भारतीय 14 वर्ष की अनिवार्य स्कूली शिक्षा के मुकाबले 10 वर्ष 2 महीने की ही स्कूली शिक्षा प्राप्त करते हैं, इसलिए वह जितना कमाने के लायक होते हैं, उससे 30.4 प्रतिशत कम की कमा पाते हैं।

157 देशों का आकलन

यह विश्व बैंक की मानव पूंजी सूचकांक की पहली रिपोर्ट है। इसमें बच्चों के जीवित रहने की संभावना, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे पैमानों पर 157 देशों का आकलन किया गया है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस सूचकांक में भारत को मिला स्थान देश में मानव पूंजी के विकास के लिए उठाए गए प्रमुख मुहिमों को परिलक्षित नहीं करता है।

बांग्लादेश और म्यामांर से भी पीछे भारत!

रिपोर्ट के मुताबकि, 0 से 1 के स्केल पर भारत का स्कोर 0.44 है, जो दक्षिण एशिया के औसत स्कोर से भी कम है। 0 से 1 के स्केल पर भारत का स्कोर 0.44 है, जो दक्षिण एशिया के औसत स्कोर से भी कम है। स्कूली शिक्षा प्राप्त करने की अवधि के मामले में भारत 107वें, बांग्लादेश 106वें, नेपाल 102वें और श्रीलंका 74वें स्थान पर है जबकि भारत 115वें स्थान पर।

स्कूली शिक्षा की अवधि में पिछड़ा भारत: रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के बच्चे 11 वर्ष, नेपाल के बच्चे 11 वर्ष 7 महीने जबकि श्रीलंका के बच्चे 13 वर्ष तक स्कूली शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसका मतलब है कि औसत भारतीय किसी बांग्लादेशी, नेपाली या श्रीलंका के बच्चों के मुकाबले अपनी पूरी क्षमता के मुताबिक कमाई नहीं कर पाता है।

जीवन प्रत्याशा का लंबाई पर प्रभाव

स्टडी में कहा गया है कि किशोरों की जीवन प्रत्याशा में 10 पर्सेंटेज पॉइंट की वृद्धि हो, तो उनकी लंबाई 1.9 सेंटीमीटर बढ़ जाएगी। अगर 0 से 1 अंक के पैमाने पर भारत में किशोरों की जीवन प्रत्याशा को 0.83 अंक मिले होते तो भारतीय डेढ़ इंच या 3.3 सेंटीमीटर यानी करीब-करीब 11 प्रतिशत ज्यादा लंबे होते।

सरकार की आपत्ति

वित्त मंत्रालय ने बयान में समग्र शिक्षा अभियान, आयुष्मान भारत कार्यक्रम, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना आदि का जिक्र करते हुए कहा कि सूचकांक तैयार करने में इनपर गौर नहीं किया गया है। इस सूचकांक में सिंगापुर को पहला स्थान मिला है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)





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