Fuel price cut: centre cuts tax on petrol and diesel only after earning lots and before crucial state polls – जब कच्चे तेल के दाम कम थे तो केंद्र ने पेट्रोल-डीजल से खूब की कमाई, अब 2.5 रुपये राहत देकर खेला राजनीतिक दांव


नई दिल्ली

केंद्र ने ऐसे वक्त में पेट्रोल-डीजल के दाम में ढाई रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है जब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बीजेपीशासित राज्यों और तेलंगाना में विधानसभा चुनावों में बमुश्किल डेढ़ से 2 महीने का वक्त है। चुनाव आयोग इन राज्यों में चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले कुछ दिनों में चुनाव कार्यक्रम भी घोषित हो सकता है। पेट्रोल-डीजल के ऊंचे दाम रोज नए रेकॉर्ड बना रहे थे। ढाई रुपये की राहत देने से पहले केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से अपना खजाना खूब भरा है। बताने की जरूरत नहीं कि सभी राज्यों ने भी (चाहे जिस पार्टी की सरकार हो) पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से खूब कमाई की है और कर रहे हैं। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 2 रुपये की कटौती की थी।

केंद्एर का क तीर से कई निशाने, विपक्ष पर बढ़ाया दबाव

केंद्र ने जहां पेट्रोल-डीजल के दाम में ढाई रुपये की राहत देकर जनता की नाराजगी को कम करने की कोशिश की है, वहीं विपक्ष से एक तरह से एक बड़ा मुद्दा भी करीब-करीब छीन लिया है। केंद्र ने सभी राज्यों से भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स का भार अपने ही बराबर यानी ढाई रुपये प्रति लीटर कम करने की अपील कर विपक्षी दलों पर दबाव भी बढ़ा दिया है। उम्मीद के मुताबिक बीजेपी/एनडीएशासित राज्यों ने केंद्र की तर्ज पर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती शुरू कर दी है। अब तक 14 राज्यों ने इसके लिए हामी भी भर दी है। इस तरह बीजेपी ने विपक्षी दलों पर दबाव बढ़ा दिया है, जिनकी पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सरकारें हैं। जाहिर है कि अगर ये राज्य टैक्स में कटौती नहीं करते तो पेट्रोल-डीजल को लेकर वे बीजेपी पर आक्रामक नहीं हो पाएंगे, इसके उलट बीजेपी को ही विपक्ष पर हमला करने का बड़ा मौका हाथ लग जाएगा। अगर गैरबीजेपीशासित राज्य सरकारें केंद्र से पहले ही पेट्रोल-डीजल पर अपने स्तर पर टैक्स में राहत दी होतीं तो सियासी लिहाज से बढ़त में होतीं। अब अगर वे टैक्स घटातीं भी हैं तो इसका श्रेय बीजेपी खुद लूटने से नहीं चूकेगी।

केंद्र और राज्यों के लिए पेट्रोल-डीजल सोने की मुर्गी

ईंधन की कीमतों में करीब आधा तो केंद्र और राज्यों का टैक्स शामिल होता है। केंद्र पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूलता है। इसके अलावा राज्य सरकारें इस पर 6 प्रतिशत से लेकर 38 प्रतिशत तक VAT (मूल्यवर्धित कर) वसूल रही हैं। केंद्र ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच पेट्रोल-डीजल पर 9 किस्तों में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाया है। इस दौरान केंद्र ने पेट्रोल पर प्रति लीटर 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाया। खास बात यह है, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिर रही थी। यानी जब कच्चे तेल की कीमत लगातार गिर रही थी तो केंद्र ने इसका लाभ उपभोक्ताओं को देने के बजाय टैक्स बढ़ाकर कीमतों को ऊंचा रखा और खूब कमाई की। सरकार की दलील थी कि इससे तेल कंपनियों के पिछले घाटों की भरपाई की जा रही है।

4 सालों में दोगुना हुआ केंद्र का एक्साइज कलेक्शन, राज्यों की भी कमाई बढ़ी

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी की वजह से पिछले 4 सालों में केंद्र का एक्साइज कलेक्शन दोगुना से भी ज्यादा हो गया। 2014-15 में जहां केंद्र का एक्साइज कलेक्शन 99.184 करोड़ रुपये था, वहीं 2017-18 में यह बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह राज्यों के VAT रेवेन्यू में भी इजाफा हुआ। 2014-15 में राज्यों का वैट रेवेन्यू 1.3 लाख करोड़ रुपये था जो 2017-18 में बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये हो गया।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में इजाफा

इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच भारतीयों ने 5.47 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष करों के तौर पर चुकाया है। यह पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही से 17 प्रतिशत ज्यादा है। पर्सनल और कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन भी 19 प्रतिशत बढ़ा है। जब भारतीय ज्यादा टैक्स जमा करते हैं तो इसका मतलब है कि पहले से ज्यादा लोग (और कंपनियां) टैक्स अदा कर रही हैं और इसका यह भी मतलब है कि वे पहले से ज्यादा कमा रहे हैं। कॉरपोरेट्स द्वारा अडवांस टैक्स जमा में 16 प्रतिशत और लोगों द्वारा अडवांस टैक्स जमा में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वित्त मंत्री जेटली ने गुरुवार को यह भी कहा कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में इजाफा से राजकोषीय घाटा को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल पर राहत के लिए इसे भी एक वजह बताई।





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