Economy News In Hindi : Preparations to put 124 companies into insolvency after closing the process of sending 914 companies to IBBI by the end of March | मार्च के अंत तक 914 कंपनियों को आईबीबीआई में भेजने की प्रक्रिया बंद करने के बाद 124 कंपनियों को इंसाल्वेंसी में डालने की तैयारी


  • 14 प्रतिशत मामले रिजोल्यूशन प्लान के साथ बंद किए गए
  • 780 मामलों में लिक्विडेशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 02:18 PM IST

मुंबई. ज्यादा रिकवरी का रिजोल्यूशन प्लान होने के बावजूद भी 124 कंपनियों को इंसाल्वेंसी में डालने की तैयारी है। यह जानकारी इंसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) के आंकड़ों से मिली है। मार्च के अंत तक 914 कंपनियों को आईबीबीआई में भेजने के लिए इंसाल्वेंसी प्रक्रिया बंद कर दी गई थी। यह कुल इंसाल्वेंसी केस का 57 प्रतिशत था। जबकि रिजोल्यूशन प्लान के साथ बंद किए गए मामले 14 प्रतिशत थे।

मैनेजमेंट बदलकर कंपनी को मजबूत बनाया जा सकता है

आईबीबीआई के चेयरमैन डॉ. एम.एस साहू ने हाल में एक न्यूजलेटर में लिखा कि अगर बिजनेस चलता रहा और कंपनियों का असेट्स का उपयोग ज्यादा असरदार तरीके से हुआ तो इनका मूल्य भी बढ़ेगा। इसलिए हम ऊंचे भाव की बजाय ऊंचे मूल्य में कंपनियों को लेने में विश्वास करते हैं। बैंकों द्वारा वैल्यू में अधिकतम वृद्धि करने की जरूरत पर जोर दिए बिना साहू ने कहा कि मैनेजमेंट बदलकर कंपनी को ज्यादा असरदार बनाया जा सकता है। इसमें या तो उनकी असेट्स बिक सकती है, या उनकी रिस्ट्रक्चरिंग हो सकती है या फिर बिजनेस किया जा सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की 396 कंपनियां आईबीबीआई में

इंसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड अमल में आने के बाद से 396 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को इंसाल्वेंसी में डाला गया है। अन्य किसी भी सेगमेंट की इतनी ज्यादा कंपनियों को इंसाल्वेंसी में नहीं डाला गया था। खबर है कि 200 कंपनियों को पानी के भाव में बेचने का आदेश दिया गया था। इसमें से रियल इस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेगमेंट की कंपनियों के अलावा रिटेल और होलसेल ट्रेड सेगमेंट की 117 कंपनियों को भी सस्ते में बेच दिया गया था।

वित्तमंत्री ने एक साल तक आईबीबीआई में कंपनियों पर रोक लगाई

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते नए इंसाल्वेंसी केस एक साल तक नहीं लेने की घोषणा की थी। उसके साथ ही कोविड-19 संबंधित कर्ज को डिफॉल्ट में शामिल नहीं करने की बात कही थीं। एमएसएमई को सुविधा देने और इंसाल्वेंसी प्रोसेस शुरू करने के लिए नए नियम में एक करोड़ की न्यूनतम सीमा तय की गई है। यह सीमा पहले एक लाख रुपए थी। बैंक हालांकि कुछ समय तक इस कानून का सहारा नहीं ले पाएंगे और वे कंपनियों को बचाने के लिए अन्य रास्तों का सहारा ले सकेंगे।

दिसंबर तक 3,254 कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज

विश्लेषकों के मुताबिक बैंको को स्ट्रेस्ड अकाउंट के संचालन के लिए ज्यादा छूट देने होगी। कारण कि उन्हें अब इंसाल्वेंसी कानून का सहारा नहीं मिलेगा। स्ट्रेस्ड असेट्स के रिजोल्यूशन के लिए बैंकों द्वारा इस तरह की सहमति का रास्ता एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरा है। कोविड-19 से पहले बैंकरप्सी अदालतों में केस की भरमार है। इस कानून के तहत दिसंबर के अंत तक 3,254 कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसमें से 180 मामलों में रिजोल्यूशन प्लान को मंजूरी भी मिली थी। जबकि 780 मामलों में लिक्विडेशन प्रक्रिया शुरू हुई थी।



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