चीन का मुंहतोड़ जवाब देगा ताइवान, सैन्य क्षमता को बढ़ाने की तैयारी – taiwan will give a befitting reply to china, tsai ing-wen announces measures to strengthen military reserves


China Taiwan Tension: ताइवान ने चीन के किसी भी हिमाकत का जोरदार जवाब देने के लिए अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन दिनों ताइवान और अमेरिकी नेवी साउथ चाइना सी में युद्धाभ्यास कर रही हैं। जिसके जवाब में चीन ने ताइवानी एयरस्पेस का उल्लंघन करना शुरू कर दिया है।

Edited By Priyesh Mishra | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

ताइवान की सेना
हाइलाइट्स

  • चीन के किसी भी हिमाकत का जोरदार जवाब देने के लिए अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी में ताइवान
  • ताइवान की ताकत में इजाफा करने के लिए रिजर्व सैन्य बलों को और मजबूत करने के लिए कई नई घोषणाएं
  • ताइवान और चीन में तनाव बढ़ने की आशंका, आज ही हॉन्ग कॉन्ग में ड्रैगन ने लागू किया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

ताइपे

ताइवान ने चीन के किसी भी हिमाकत का जोरदार जवाब देने के लिए अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन दिनों ताइवान और अमेरिकी नेवी साउथ चाइना सी में युद्धाभ्यास कर रही हैं। जिसके जवाब में चीन ने ताइवानी एयरस्पेस का उल्लंघन करना शुरू कर दिया है। इधर चीन के किसी भी प्रकार के आक्रामक रवैये से निपटने के लिए ताइवान की नेवी और एयरफोर्स अलर्ट पर है।

ताइवानी सेना का बैकअप प्लान पेश

राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने ताइवान के सैन्य ताकत में इजाफा करने के लिए रिजर्व सैन्य बलों को और मजबूत करने के लिए कई नई घोषणाएं की हैं। जिसके तहत रिजर्व फोर्स को ताइवानी सेना के लिए मजबूत बैकअप के रूप में विकसित किया जाएगा। त्साई ने सशस्त्र सेना रिजर्व कमान में आयोजित एक पुरस्कार समारोह के दौरान इन सुधारों की घोषणा की।

सेना के समान रिजर्व फोर्स बनाने की तैयारी

जिसके तहत एक रिजर्व फोर्स को बनाया जाएगा जो नियमित सशस्त्र बलों की तरह ही ताकतवर होगी। उन्हें वे सभी हथियार और सैन्य साजो समान दिए जाएंगे जिसका इस्तेमाल ताइवानी सेना करती है। इसके अलावा विभिन्न बलों के बीच में रणनीतिक समझ और विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग भी विकसित किया जाएगा।

चीन ने हाल के दिनों में तेज की कार्रवाई

ताइवानी राष्ट्रपति की यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन ने आज ही हॉन्ग कॉन्ग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू किया है और ताइवान को भी एक देश दो तंत्र के तहत मिलाने की धमकी दी है। इसके अलावा चीन हमेशा से ताइवान को अपने देश में सैन्य ताकत से मिलाने की धमकी देता रहा है। हाल के दिनों में कई बार चीनी एयरक्राफ्ट से ताइवानी एयरस्पेस का उल्लंघन भी किया है।

10 दिन में छठी बार चीनी फाइटर जेट को ताइवान वायुसेना ने खदेड़ा

क्यों है चीन और ताइवान में तनातनी

1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद चियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्यूनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है।

US के तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

  • US के तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

    अमेरिका ने पहले ही ताइवान के समीप अपने तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात कर दिया है। जिसमें से दो ताइवान और बाकी मित्र देशों के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं, वहीं तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर जापान के पास गश्त लगा रहा है। अमेरिका ने जिन तीन एयरक्राफ्ट कैरियर को प्रशांत महासागर में तैनात किया है वे यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट, यूएसएस निमित्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन हैं।

  • अमेरिका यूं ही नहीं भेज रहा सेना

    अमेरिका के पास दुनिया की सबसे आधुनिक सेना और हथियार हैं। दुनियाभर के देशों की सैन्य ताकत का आंकलन करने वाली ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स के अनुसार 137 देशों की सूची में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के मामले में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों से बहुत आगे है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के दुनिया में 800 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें 100 से ज्यादा खाड़ी देशों में हैं। जहां 60 से 70 हजार जवान तैनात हैं।

  • एशिया में किन-किन देशों को चीन से खतरा

    एशिया में चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत को सबसे ज्यादा खतरा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है। इसके अलावा चीन और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है। हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के प्रयोग की धमकी दे चुका है। इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं चीन का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी विवाद है।

  • एशिया में 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक

    फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे एशिया में चीन के चारों ओर 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सेना के जवान हर वक्त मुस्तैद हैं और किसी भी अप्रत्याशित हालात से निपटने में भी सक्षम हैं। वहीं चीन की घेराबंदी में अमेरिका और अधिक संख्या में एशिया में अपनी सेना को तैनाक करने की तैयारी कर रहा है। इससे विवाद और गहराने के आसार हैं। जानिए एशिया मे कहां-कहां है अमेरिकी सैन्य ठिकाने-

  • डियेगो गार्सिया से हिंद महासागर पर नजर

    मालदीव के पास स्थित डियेगो गार्सिया में अमेरिकी नेवी और ब्रिटिश नेवी मौजूद है। यह द्वीप उपनिवेश काल से ही ब्रिटेन के कब्जे में है और हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस लोकेशन से चीनी नौसेना की हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है।

  • जापान में अमेरिका की तीनों सेना मौजूद

    जापान में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिकी सेना मौजूद है। एक अनुमान के मुताबिक यहां अमेरिकी नेवी, एयरफोर्स और आर्मी के कुल 10 बेस हैं जहां एक लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका और जापान में हुई संधि के अनुसार इस देश की रक्षा की जिम्मेदारी यूएस की है। यहां से साउथ चाइना सी पर भी अमेरिका आसानी से नजर रख सकता है।

  • गुआम से उत्तर कोरिया को कंट्रोल करता है US

    प्रशांत महासागर में स्थित इस छोटे से द्वीप पर अमेरिकी सेना की महत्वपूर्ण रणनीतिक मौजूदगी है। इस द्वीप से अमेरिकी सेना न केवल प्रशांत महासागर में चीन और उत्तर कोरिया की हरकतों पर नजर रख सकता है बल्कि उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने और नेवल ब्लॉकेज लगाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। यहां 5000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती है।

  • साउथ कोरिया में तैनात है अमेरिकी फोर्स

    उत्तर कोरिया के कोप से बचाने के लिए दक्षिण कोरिया में अमेरिकी फौज तैनात है। जिसमें आर्मी, एयरफोर्स, मरीन कॉर्प और यूएस नेवी के जवान शामिल हैं। यहां से अमेरिका चीन की हरकतों पर भी निगाह रखता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यहां 28500 ट्रूप्स तैनात हैं।

  • फिलीपींस में भी US बेस, चीन पर नजर

    चीन के नजदीक फिलीपींस में भी अमेरिकी सेना का बेस मौजूद है। हाल मे ही फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे ने अमेरिका के साथ दो दशक पुराने विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA)को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। बता दें कि 2016 में सत्ता में आने के बाद से रोड्रिगो डुटर्टे का झुकाव चीन की तरफ ज्यादा था। जिस कारण अमेरिका से फिलीपीन्स की तल्खियां भी बढ़ी थी।

  • ताइवान में बेस तो नहीं, लेकिन US की उपस्थिति ज्यादा

    ताइवान में अमेरिकी सेना का कोई स्थायी बेस नहीं है, लेकिन यहां अमेरिकी सेना अक्सर ट्रेनिंग और गश्त को लेकर आती जाती रहती है। वर्तमान समय में भी अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर इस इलाके में तैनात हैं। अमेरिका शुरू से ही ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थक रहा है। हाल के दिनों में चीन से बढ़ते टकराव के बाद से अमेरिका ने पूर्वी चीन सागर और ताइवान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी शुरू कर दी है।

  • अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक

    अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा यहां गठबंधन सेनाओं के आठ हजार सैनिक भी हैं जो तालिबान के खिलाफ अक्सर कार्रवाईयों को अंजाम देते रहते हैं। हालांकि अमेरिका ने हाल के दिनों में अफगानिस्तान में तैनाक अपने सैनिकों की जानकारी नहीं दी है। अमेरिकी सैनिक बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान की सेना को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।

  • इन देशों में भी अमेरिकी सेना तैनात

    सिंगापुरएसेसन द्वीपकजाखिस्तान

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन

चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है। हालांकि ताइवान में जबसे डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में आई है तबसे चीन के साथ संबंध खराब हुए हैं।

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Web Title taiwan will give a befitting reply to china, tsai ing-wen announces measures to strengthen military reserves(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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